Sunday, February 9, 2014
माँ
माँ
सर्दी का वह मौसम
और सुबह कि पहली धूप
पीले आँचल में लिपटा
माँ का वो दूधिया रूप।
लेकर पूजा कि थाली
तुलसी चौड़े तक जाना
मुँडेर पर कौए का इतराना
टन टन .. टन टन ...
आठ आने का खोमचा
मेरे जिद के आगे
हर बार विफल होती थी
आँचल के
खूंट में बंधा दो रूपया
माँ मुझको दे देती थी ..
क्रमश ...
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपना विचार अवश्य दें
खुजली न होता तो
खुजली न होता तो इतना हँसाता कौन
जान चुके जिस शिकारी को
फिर से उसके जाल में फँसाता कौन
कश्मीर अपने बाप को लौटाता कौन
मुद्दे दिल्ली में आरक्षण का उठाता कौन
ये तो बुद्धु थी जनता,
वर्ना वंदे मातरम गाता ही कौन !
मोहब्बत भाईचारे फैलाता कौन
बकरे और कसाई को
एक घाट पर पानी कहो फिर पिलाता कौन
लेकर झारु इतराता कौन
भैंस के आगे बीन बजता कौन
पर एक बात बतादे भैय्या
जिस कॉंग्रेस को तू देता गाली
उसके बिना तू है कौन ???
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपना विचार अवश्य दें
सम्पूर्ण महाभारत बाँकी है
कमर कस ले ऐ
भगवा फहराने वाले
अभी लाख लांक्षणा बाँकी है
दुश्मन होशियार बहुत है
ये तो बस एक झांकी है
तू अभिमन्यु सा चक्रव्यूह भेद रहा
अट्ठहास कौरवों का झेल रहा
घेरे में भगवान भी होंगे
सम्पूर्ण महाभारत बाँकी है
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपना विचार अवश्य दें
हममें भी आपको कोई अपना ही मिलेगा
दुख को बाँट दे हममे ...
हँसा छुपकर भी कीजिये तो चलेगा !
हमें आवाज लगाइये न लगाइये ....
भरोसा मेरे साथ होने का न किया तो खलेगा
खालीपन तो मन के गलियारों में है ...
ज़रा नज़र तो उठाइये ...
हममें भी आपको कोई अपना ही मिलेगा :)
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपना विचार अवश्य दें
----हार पर विजय---
----हार पर विजय---
हार गिरे तब धार करे
जब धार करे तब वार करे
जब वार करे संहार करे
हुंकार भरे हुँकार भरे
ग्लानी कुंठा को जगह नहीं अब
तज स्वाभिमान और आडम्बर को
कृतग्य भाव से अमूल्य समय का सत्कार करे
विविधा नहीं दुविधा नहीं
बाधाओं को आने दो
बन अंधकार के बादल मंडराने दो
प्रतिकार करे प्रतिकार करे
जो घात करे प्रतिघात करे
सहश्त्र भानु पर विजय करे
क्यों चंद्रकला को भ्रमित हो
श्रम हमारा रथ होगा धैर्य हमारी ढाल
द्रिढता को तलवार करे
अटल युद्ध पर अडिग हों
हर मुश्किल को हम पार करे
हार गिरे तब धार करे
जब धार करे तब वार करे
जब वार करे संहार करे
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपनी विचार अवश्य दें
धिक्कार है ..
धिक्कार है धिक्कार है ..
नेता पर धिक्कार है
न्यायाधीश पर धिक्कार है
गन्दी होती मीडिया पर
भूखे भेरिया पर
कीचड़ फेक रहे केशरिया पर
धिक्कार है धिक्कार है !
मार सके संसद में घुस कर गोली
ऐसे उबलते खूनो कि दरकार है ..
उघर रही भारत कि छाती ...
हाय युवा बन रहे संयासी :(
तहलका के तरुण पर
नारी अपमानी राहुल पर
देवी से डायन कि तुलना ..
हरीश भी मक्कार है
धिक्कार है धिक्कार है .....!
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपनी विचार अवश्य दें
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