मेरी कविता
Sunday, February 9, 2014
कहमुकरी : प्रेम
कहमुकरी : प्रेम
न कछु रासै न केहु भावै
कर्ण बजै मधुर संगीत
के सखी उलझन
,
न सखी प्रीत
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