Sunday, February 9, 2014

मेरा चलना जारी है …

चला मैं भी चला वो भी

तुम्हे मंजिल मिल गयी

मेरा चलना जारी है

चला वो भी चला मैं भी

गिरा वो भी गिरा मैं भी

वो रूक गया !

मेरा चलना जारी है …

हारे तो वो हैं

जिसे बाधाओं ने रोक दिया

जन्म लिया नहीं

लेकर चांदी के चमचे मुँह में


चला अकेला

मेरे साथ बस मेरी खुद्दारी है !


 

  आलोचनाओं कि परवाह किये बिना ही जो परमार्थ के सतत कार्य किये जाते हैं वही तो संत कहलाते हैं :)
 क्या भारत माँ के वही सच्चे सपूत हैं जो वर्दी को पातें कैसे भूले उनको जो साथ वीरगान के धुन बजाते हैं


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