चला मैं भी चला वो भी
तुम्हे मंजिल मिल गयी
मेरा चलना जारी है
चला वो भी चला मैं भी
गिरा वो भी गिरा मैं भी
वो रूक गया !
मेरा चलना जारी है …
हारे तो वो हैं
जिसे बाधाओं ने रोक दिया
जन्म लिया नहीं
लेकर चांदी के चमचे मुँह में
चला अकेला
मेरे साथ बस मेरी खुद्दारी है !
आलोचनाओं
कि परवाह किये बिना ही जो
परमार्थ के सतत कार्य किये
जाते हैं वही तो संत कहलाते
हैं :)
क्या
भारत माँ के वही सच्चे सपूत
हैं जो वर्दी को पातें कैसे
भूले उनको जो साथ वीरगान के
धुन बजाते हैं ।
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