Sunday, February 9, 2014

माँ

माँ 

सर्दी का वह मौसम

 

और सुबह कि पहली धूप

 

पीले आँचल में लिपटा

 

माँ का वो दूधिया रूप।

 

लेकर पूजा कि थाली

 

तुलसी चौड़े तक जाना

 

मुँडेर पर कौए का इतराना



 टन टन .. टन टन ...

 

आठ आने का खोमचा

 

मेरे जिद के आगे

 

हर बार विफल होती थी

 

आँचल के

 

खूंट में बंधा दो रूपया

 

माँ मुझको दे देती थी ..

 

क्रमश ...







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