कमर कस ले ऐ
भगवा फहराने वाले
अभी लाख लांक्षणा बाँकी है
दुश्मन होशियार बहुत है
ये तो बस एक झांकी है
तू अभिमन्यु सा चक्रव्यूह भेद रहा
अट्ठहास कौरवों का झेल रहा
घेरे में भगवान भी होंगे
सम्पूर्ण महाभारत बाँकी है
अच्छी या बुरी जैसी भी ,अपना विचार अवश्य दें
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