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निशां
छोड़ दे तू इस कदर यादों के फलक
पे
के
जब भी तेरा जिक्र आये
होंठ
मुस्कुराये और अश्रु बाँधे
न बंधे पलक पे
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महज
साँसों
का उतार-चढ़ाव
नहीं
है जिंदगी
वक़्त
ढलान है
जीवन
यात्रा
प्रेम
पड़ाव।
इस
आपाधापी में
कुछ
कीमती
है
तो
है
ठहराव।
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भावनाएँ
प्रबल है
हम
साथ सबल
समय
निष्ठुर
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जानता
हूँ
तुमने
अंतरमन में
अथाह
प्रेम सिमेट रक्खा है
पर
...
इस
प्यार को पाने में
उसी
तरह घायल हो जाता हूँ
जैसे
नारियल फोड़ के खाने में !
तुम
…
आम
सा क्यूँ नहीं होती …
जरा
सी छुअन से मधुर रसधार से भीगा
देती !
अच्छा या बुरा जैसा भी, अपना विचार अवश्य दें
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