Sunday, February 9, 2014

कीमती है ठहराव।

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निशां छोड़ दे तू इस कदर यादों के फलक पे

 

के जब भी तेरा जिक्र आये

 

होंठ मुस्कुराये और अश्रु बाँधे न बंधे पलक पे

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महज

 

साँसों का उतार-चढ़ाव

 

नहीं है जिंदगी

 

वक़्त ढलान है

 

जीवन यात्रा

 

प्रेम पड़ाव।

 

इस आपाधापी में

 

कुछ

 

कीमती है

 

तो है

 

ठहराव। 

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भावनाएँ प्रबल है

 

हम साथ सबल

 

समय निष्ठुर

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जानता हूँ

 

तुमने अंतरमन में

 

अथाह प्रेम सिमेट रक्खा है

 

पर ...

 

इस प्यार को पाने में

 

उसी तरह घायल हो जाता हूँ

 

जैसे नारियल फोड़ के खाने में !

 

तुम …

 

आम सा क्यूँ नहीं होती …

 

जरा सी छुअन से मधुर रसधार से भीगा देती !


 अच्छा या बुरा जैसा भी, अपना विचार अवश्य दें 

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