लघु पंक्तियाँ
लेकर
कीमत साँसों कि
फूलों
का तौफा देते हैं
कैसे
गैरों से मोहब्बत होती है
यहाँ
तो अपने धोखा देते हैं !
--------------------------------------------------
माना
जो गुज़र गया सो गुज़र गया
पर
ज़ख्म वो इतना गहरा छोड़ गया
की
जब भी उसे भुलाने की सोची
कमबख्त
ये भरने से मुकर गया
-------------------------------
सोचती
होगी छोड़ उसे चैन से सो रहा
होऊंगा
और
ये भी जानती है की उसके बिना
जी नहीं सकता
बैठ
कोने में कहीं रात भर रो रहा
होऊंगा ...
----------------------------------------
बहुत
रात हो गयी है
अब
तुम भी सो जाओ
क्यों
जगाते हो और ...
जागते
हो मेरे ख्यालों में
------------------------------------
कब
से इस उलझन में हूँ
गोरी
गेंदा गमके या तू
-----------------------------------
अच्छा या बुरा जैसा भी, अपना विचार अवश्य दें
No comments :
Post a Comment