मैं इंडिया गेट हूँ ...
मैं इंडिया गेट …
भारतीय सेना ही नहीं
भारतीय सीना कि पहचान
मर मिटनेवालों ने कौम नहीं देखा
बस वफादारी देखी …
हजारो शहीदों के नाम का तख्त
जिन्होंने कर्त्तव्य से बढ़ कुछ नहीं देखा
आज भी हमारे जवान
मोर्चा सम्भाले हुए हैं देश से बाहर
कभी उनके कंधे सहारा बनते
साऊथ अफ्रीका के भूकम्पों में
कभी UNO में सेवा देते
या लड़ रहे हैं … कर रहे हैं
आतंकियों को नेस्तनाबूत
70,000 सेना
माना जिसके लिए लड़े
वो अंग्रेज थे ..
पर
छलनी होने वाला सीना
हिंदुस्तानी था।
माना इमारत गैरों ने गढ़ दी
पर इसकी हर ईंटे . .
वीरता कि कहानी
माओं ने जो बेटे
प्रथम विश्वयुद्ध में खोये
क्या वो नहीं थे
भारतीय … ?
उकेरे गए जो नाम
वो कोई और नहीं …
हमारे ही अपने थे
मैं इंडिया गेट हूँ …
मेरे वक्ष पर प्रज्वलित
जो अंगारे हैं
यह उन अमर शहीदों के
यादों के शीतल फव्वारे हैं
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