Sunday, February 9, 2014

रूठता तो माँ से था




मैं कभी नहीं रूठूँगा  …
कभी नहीं
कभी नहीं रूठूँगा !
कभी नहीं रूठूँगा तुमसे !!
क्यूँकि रूठता तो माँ से था  …
वो मनाये बिना न सोती थी।


तुम्हे जीत तो मैं लूँगा ही  … अफसोस प्रेम भी जीता जा सकता !

 

अच्छा या बुरा जैसाभी, अपना विचार अवश्य दें

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